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गले का इंफेकà¥à¤¶à¤¨ कब हो सकता है जानलेवा ? जानें बचने के उपाय
गले का इंफेकà¥à¤¶à¤¨ अकà¥à¤¸à¤° मौसम के बदलने पर हो ही जाता है। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में अकà¥à¤¸à¤° सरà¥à¤¦à¥€-खांसी à¤à¥€ होती ही रहती है। कहने को तो गले का इंफेकà¥à¤¶à¤¨ बहà¥à¤¤ ही साधारण परेशानी है लेकिन यह जानलेवा à¤à¥€ हो सकती है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ गले के इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की वजह से हारà¥à¤Ÿ के वालà¥à¤µ और किडनी पर इसका बà¥à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ जाता है।
गले के इंफेकà¥à¤¶à¤¨ में à¤à¤• विशेष तरह का कीटाणॠहारà¥à¤Ÿ के वालà¥à¤µ या किडनी के ऊपर अटैक कर देते हैं। किडनी पर जब ये कीटाणॠहमला करते हैं तो बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤•रण की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पर असर पड़ता है। मेडिकल की à¤à¤¾à¤·à¤¾ में इसे नेफà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ कहते हैं। इसकी वजह से किडनी कà¥à¤› समय के लिठकाम करना बंद कर सकती है। पेशाब कम आना या पेशाब में खून आना इसके लकà¥à¤·à¤£ हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ हाथ-पैर में सूजन के साथ बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° à¤à¥€ बढ़ जाता है।
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में इसका इलाज संà¤à¤µ है लेकिन बार-बार इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने पर किडनी फेल होने का खतरा रहता है। गले के इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से वालà¥à¤µ पर जो असर होता है उसकी वजह से वालà¥à¤µ सिकà¥à¤¡à¤¼ सकते हैं या उनकी कारà¥à¤¯ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकती है। वालà¥à¤µ की कारà¥à¤¯ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होने की वजह से बà¥à¤²à¤¡ का सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है। कà¥à¤› मामलों में माइटà¥à¤°à¤² या à¤à¤“रटिक नामक बीमारी होती है जो खासकर बायीं तरफ के वलà¥à¤µ की खराबी है।
कई बार हृदय इस वजह से फूलने लगता है या खून का पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° उसमें बà¥à¤¨à¥‡ लगता है, अतः जब à¤à¥€ गला खराब हो उसे गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ से लें। बà¥à¤–ार की दवाओं के साथ-साथ à¤à¤‚टीबायोटिक का पूरी मातà¥à¤°à¤¾ में सेवन करें। वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ लगाने से à¤à¥€ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की रोकथाम की जा सकती है। खान-पान की तरफ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें, विटामिन सी का सेवन करने से बीमारी से बच सकते हैं।
तंग बसà¥à¤¤à¥€ में रहने वाले तथा जहाठपर वायॠपà¥à¤°à¤¦à¥‚षित हो वहाठयह बीमारी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। अगर हà¥à¤°à¤¦à¤¯ का वालà¥à¤µ खराब हो गया हो तो लंबे समय तक हà¥à¤°à¤¦à¤¯ रोग की दवाइयों के साथ पà¥à¤¨: इंफेकà¥à¤¶à¤¨ ना हो इसके लिठपेनिसिलिन नामक à¤à¤‚टीबायोटिक निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में समय-समय पर लगानी पड़ती है।
अगर इससे à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है तो अनà¥à¤¯ à¤à¤‚टीबायोटिक का सेवन करना चाहिà¤à¥¤ समय-समय पर हà¥à¤°à¤¦à¤¯ के चेकअप से वालà¥à¤µ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का अंदाजा लगाया जा सकता है। कालांतर में अगर खराबी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है तो वालà¥à¤µ का ऑपरेशन à¤à¥€ करना पड़ सकता है। अत: सावधानी बरतें और गले की खराबी से बचें।
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